अद्वितीय

अद्वितीय दर्शन की भाषा मेंकहा जा सकता हैदूसरा कोई नहींव्यवहार की भाषामें कहा जा सकता हैअकेला कोई नहींअपेक्षित सुधार व परिस्कार हो,और उसके हर कदम के साथसंतुलन का अनोखा उपहार होबाहरी दुनियां का भ्रमणतो केवल संसार समुद्र मेंआत्मा का भटकन है वहइसी में क्यों पागल बनाहमारा यह मन और जीवन हैजिस दिन हमें अन्तर केआनन्द … Continue reading अद्वितीय