बादल! ( Badal ) मेरी मुंडेर की तरफ बढ़ रहा बादल, अरब सागर की तरफ से चढ़ रहा बादल। न जाने कितने क्विंटल पानी से है भरा, तूफानी हवाओं से भी लड़ रहा बादल। सूख चुके तालाब,नदी,डैम न जाने कब के, उनकी चीख- चीत्कार को सुन रहा बादल। सागर की कोख से फिर जन्म … Continue reading Badal par Hindi Kavita | बादल
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