बेमानी ( Bemani ) हक़ीक़त दिलों की यहाँ किसने जानी है, गहराई जितनी उतनी उलझी कहानी है। अक्सर सूरत में छिप जाते है किरदार वरन हर मुस्कुराते चेहरे की आँख में पानी है। अपने ही किस्से में मशगूल रहे इस कदर एहसासों की अनकही बातें किसने जानी है। हरी हो टहनी तो सह लेती … Continue reading बेमानी | Bemani
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