Category: पुस्तक समीक्षा
भारतीय संस्कृति के तत्कालीन वैभव और विस्तार को प्रमाणित करती है “मन पवन की नौका”
भारतीय संस्कृति के तत्कालीन वैभव और विस्तार को प्रमाणित करती है “मन पवन की नौका” ( Man Pawan Ki Nauka : Book Review ) कुबेरनाथ राय द्वारा रचित ललित निबंध संग्रह का शीर्षक “मन पवन की नौका” सार्थक सिद्ध होता जान पड़ता है।पुस्तक के सम्पूर्ण दस निबंधों में रचनाकार अपने मन की गति से…
पदम- अग्नि | आलेख
।। पदम- अग्नि ।। आलेख पुस्तक के शीर्षक से ही समझ सकते है, कि सुकोमल मुलायम सी पंखुड़ियों याने पदम और उसका शब्द अग्नि याने पवित्रता अग्नि को सनातन संस्कृति में सबसे पवित्र माना गया है । रानी पद्मावती के जीवन पर प्रकाश डालती हुई रचना में उसके अतुल्य सौंदर्य और उसके साथ उनकी…
युवाओं के लिए बेहद चर्चा का विषय रहा बेहद मोहब्बत | Book review
बिहार कई बड़े साहित्यकारों की धरती रही है। निरंतर इस मिट्टी से कोई न कोई कवि और लेखक निकलता ही आ रहा है। इसी कड़ी में युवा साहित्यकार कवि व लेखक आलोक रंजन की दुसरी काव्य संग्रह बेहद मोहब्बत प्रकाशित हो चुकी है। यह किताब आनलाईन बाजार के हर दुकान पर उपलब्ध है। आलोक रंजन…
Book Review | हिंदी भारतीय साहित्य में नया प्रयोग ‘3020 ई.’
राकेश शंकर भारती का उपन्यास 3020 ई. सम्भवत: हिंदी साहित्य का ऐसा पहला उपन्यास है जिसकी कल्पना का आधार विज्ञान है। आज से पूर्व हमने जितने उपन्यास पढ़े हैं वह एक परिपाटी से बंधे दिखायी देते हैं। एक कहानी जो आरंभ, उत्कर्ष, पराकाष्ठा से गुज़रती हुई फल को प्राप्त करती है। इसके अंतर्गत प्रेम कथाएँ,…
Book Review | बुलंद हौंसले
पुस्तक समीक्षा: बुलंद हौंसले ( Book Review: Buland hausle ) साहित्य समाज का दर्पण होता है ह्रदय में उठते भावों को शब्दों में बदलकर एक माला के रूप में पिरोना एक लेखक की वो कला है जिससे वह अपनी लेखनी से लिखित साहित्य को समाज के दर्पण के रूप में सबके सामने प्रस्तुत करता है और…
Book Review | एक हज़ार साल आगे की सोच, उपन्यास 3020 ई. से
पुस्तक समीक्षा: एक हज़ार साल आगे की सोच, उपन्यास 3020 ई. से ( Book Review: Ek Hajar Saal Aage Ki Soach , Upanyas 3020 AD ) किताब- 3020 ई. विधा- उपन्यास (साइंस फिक्शन) लेखक- राकेश शंकर भारती समीक्षक- डॉ. सत्यनारायण चौधरी, सहायक प्राध्यापक (हिंदी साहित्य), जयपुर, राजस्थान प्रकाशक- अमन प्रकाशन, कानपुर उपन्यास के कुल…
Book Review | मेरी नजर में ‘आका बदल रहे हैं’ ग़जल संग्रह
मेरी नजर में ‘आका बदल रहे हैं’ ग़जल संग्रह ‘आका बदल रहे हैं’- गजल संग्रह, श्री विजय तिवारी का एक बहुत सार गर्भित ग़जल संग्रह है। साहित्य और समाज दोनों का चोली दामन का संबंध है, इस लिहाज से भी इन ग़जलों में प्रस्तुत भाव,विचार, व्यंग्य,जैसे-जैसे इस गजल संग्रह को हम पढ़ते हैं, वैसे वैसे…
Book Review : Aaka Badal Rahe Hain -पुस्तक समीक्षा: आका बदल रहे हैं
पुस्तक समीक्षा: आका बदल रहे हैं ( गजल संग्रह ) ( Book Review: Aaka Badal Rahe Hain ) लेखक: विजय कुमार तिवारी सेतु प्रकाशन माधव पार्क -२ बस्त्राल रोड, बस्त्राल अहमदाबाद -382418 मूल्य: रु. 180 डॉ अलका अरोडा प्रोफेसर -देहरादून के द्वारा आदरणीय श्रीमान विजय कुमार तिवारी…