एक कप चाय गरम ( Ek Cup Chai Garam ) जब भी मिलती हमें चाय-गरम, खुल जाता है यह हमारा करम। निकल जाते अंदरुनी पूरे भरम, हम हो जाते है भीतर से नरम।। मैं न करता चाय काफ़ी में शरम, परिवार रिश्तेदार या मित्र परम। ठण्डी हो चाहे फिर वह हो गरम, जहाँ पर … Continue reading एक कप चाय गरम | Chai Garam
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