Hindi Kavita | Hindi Poetry | Hindi Poem | चार लाइनें

रथ खुश रहिए जहां रहिए सहज भाव से रहिए राष्ट्र के रथ में कई धर्म के पहिए हिंदू,मुस्लिम, सिक्ख,ईसाई अपना भी इसे कहिए शेखर कुमार श्रीवास्तव दरभंगा,बिहार कहानी कर दे सच बोलने लगा हूँ तो मिटा कर मुझे कहानी कर दे निर्मल आनंद कर दे,मुझे बहता हुआ पानी कर दे मिट्टी की देह मिट्टी से … Continue reading Hindi Kavita | Hindi Poetry | Hindi Poem | चार लाइनें