दीपक वोहरा की कविताएं | Deepak Vohra Poetry
कविता में वो कविता मेंकविता ढूंढ़ रहे हैंमैं मनुष्यता वो कविता मेंभाषा देख रहे हैंमैं तमीज़ वो कविता मेंशिल्प शैली छान रहे हैंमैं पक्षधरता छंद, रस, बिंब ,सौन्दर्य, लयन जाने क्या क्या कसौटी परवो परख रहे हैं कविता और मैं न बाज़ीगर हूं कविता कान ही तथाकथित बड़ा साहित्यकारबस मनुष्यता का पक्षधर हाथ वो हाथजो … Continue reading दीपक वोहरा की कविताएं | Deepak Vohra Poetry
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