देखना है | Dekhna Hai

देखना है ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,उसे सितमगर को भुला कर देखना है। ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है। चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बतपर कहाॅं बाजार जाकर देखना है। वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों मेंबुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है। इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,फिर हमें … Continue reading देखना है | Dekhna Hai