देखना है | Dekhna Hai

देखना है

ज़ब्त अपना आजमाकर देखना है,
उसे सितमगर को भुला कर देखना है।

ज़र्फ़ की उसके मिसालें लोग देते,
बस जरा गुस्सा दिला कर देखना है।

चंद सिक्कों में सुना बिकती मोहब्बत
पर कहाॅं बाजार जाकर देखना है।

वह ख़ुदा रहता हमारे ही दिलों में
बुग़्ज़ की ऐनक हटाकर देखना है।

इश्क़-ए-दुश्वारी में लज्ज़त है अगर तो,
फिर हमें भी दिल लगा कर देखना है।

ज़िंदगी भर हम रहे नाकाम तो क्या,
अब किसी के काम आकर देखना है।

पूछता तर्क-ए-त’अल्लुक का सबब वो
उसकी कोताही गिनाकर देखना है।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

ज़ब्त – बर्दाश्त
ज़र्फ़ – सहनशीलता
बुग़्ज़ – वैमनस्यता
लज्ज़त – मज़ा
तर्क-ए-त’अल्लुक – संबंध समाप्त करना

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • शिकायत न शिकवा | Ghazal Shikayat na Shikwa

    शिकायत न शिकवा ( Shikayat na Shikwa ) चलो अब रहा तुम से वादा हमारा, पलटकर ना तुमको देखेंगे दोबारा ! मुसीबत में डाले खुदी को खुद से, दिखाया मुहब्बत ने कैसा नज़ारा ! टूटे है कहाँ से कैसे हम बताये, हुआ कैसा दिल का ख़सारा ख़सारा ! नहीं है शिकायत न शिकवा किसी से,…

  • सौगात सावन में | Saugaat Sawan Mein

    सौगात सावन में ( Saugaat Sawan Mein ) तुम्हारी चाहतें हमको मिली सौगात सावन में । जताकर प्यार को अब हम करें शुरुआत सावन में ।१ बढ़ाना है नहीं तुझसे मुझे अब राबता कोई सतायेगा मुझे फिर से तू हर इक रात सावन में ।। २ झुकाकर क्यों नयन बैठे हमें अब लूटने वाले। सुना…

  • आज़ाद है

    आज़ाद है कहने अपनी बात को अब हर सुख़न आज़ाद हैबंदिशें कोई नहीं अब हर कहन आज़ाद है हर गली हर शह्र और आज़ाद है ये हर पहरसाँस लेते चैन से हम ये पवन आज़ाद है नफ़रतों के दायरों को तोड़ डालो मिल के सबइल्तिजा बस अम्न की है, अब वतन आज़ाद है टूटी ज़जीरें…

  • सर्द पड़े रिश्ते | Sard Pade Rishte

    सर्द पड़े रिश्ते ( Sard Pade Rishte ) सर्द पड़े इन रिश्तों को,फ़िर गर्माना , ज़रूरी है । सोये हुए एहसासों को ,फ़िर जगाना , ज़रूरी है । दिल में उभरे इन भावों को ,बाहर लाना , ज़रूरी है । रिश्तों में घुली जो कड़वाहट ,उसका भी अन्त ज़रूरी है । मन में बैठी पीड़ाओं…

  • अजनबी बन के | Ajnabi Ban ke

    अजनबी बन के ( Ajnabi ban ke ) शाइरी तेरी लगे मख़मली कोंपल की तरहकूकती बज़्म में दिन रात ये कोयल की तरह अजनबी बन के चुराई है नज़र जब वो मिलेमुझको उम्मीद थी लगते वो गले कल की तरह ख्वाहिशें दफ़्न हैं साज़िश है बदनसीबी भीज़ीस्त वीरान हुई आज है मक़्तल की तरह मुस्तक़िल…

  • ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए

    ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ज़िन्दगी से हमें और क्या चाहिए ।आपका बस हमें आसरा चाहिए ।। हार कर भी हमें सोचना चाहिए ।उसकी वाजिब सबब ढूँढ़ना चाहिए ।। जाँ रहा हूँ मिलूँगा तुझे भी सनम ।देखना पर तुम्हें रास्ता चाहिए ।। दो विदाई मुझे आज मुस्कान से ।फिर मिलूँ मैं तुम्हें तो दुआ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *