आज का काव्यानंद | डॉ० रामप्रकाश ‘पथिक’

जल का बल बढ़ा हुआ है आजकल, नालों का अभिमान।सब पथिकों के मार्ग में, बने हुए व्यवधान।। नदियाँ पोखर ताल सब, बने कष्ट के हेतु।जल के बल ने कर दिए, व्यर्थ बहुत से सेतु।। भारी बम-बौछार समांत— आरपदांत—- बचाओ इस दुनिया कोमात्राभार- २४छंद — रोला भारी बम-बौछार, बचाओ इस दुनिया को।मचता हाहाकार, बचाओ इस दुनिया … Continue reading आज का काव्यानंद | डॉ० रामप्रकाश ‘पथिक’