दुख ही दुख | Dukh Shayari Hindi

दुख ही दुख ( Dukh hi dukh )   बोझ यहीं रहता है मन में दुख ही दुख झेले बचपन में याद बहुत आया आज मुझे खेला हूँ जिस घर आंगन में फ़ूल भरे दामन में कैसे वीरां है गुलशन गुलशन में और नहीं कोई भाता है तू रहती दिल की धड़कन में याद किसी … Continue reading दुख ही दुख | Dukh Shayari Hindi