एक दिन और ( Ek din aur ) मध्यान्ह जिस वक़्त थोड़ी देर के लिए रुक – सा जाता है, उस वक़्त धूम भी रुकती-सी जान पड़ती है । जब उस पार का अरण्य गहरा हरा हो उठता है, और मैं अपने कामों की गिनती करते-करते जब अपना सिर ऊपर उठाती हूँ— मन्दार अपनी … Continue reading एक दिन और | Ek Din Aur
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed