मेरे पास तुम हो | Ghazal on Ishq
मेरे पास तुम हो ( Mere paas tum ho ) सुब्ह हो या शाम,मेरे पास तुम हो दिल को है आराम,मेरे पास तुम हो देखता रहता हूँ मैं सूरत तुम्हारी और क्या है काम,मेरे पास तुम हो हमसफ़र तुम हो तो अब इस ज़िंदगी का कुछ भी हो अंज़ाम,मेरे पास तुम हो एक दूजे … Continue reading मेरे पास तुम हो | Ghazal on Ishq
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