हे राम!

हे राम! ** कर जोड़ करूं तेरा वंदन, हे रघुनंदन ! हे रघुनंदन। दशरथ-कौशल्या के नंदन, तीनों लोक करे तेरा वंदन; महादेव इन्द्र ब्रह्मा भी करें पूजन। अतातायियों के हो संहारक, सतपथ के हो सृजन कारक। दुष्ट पापियों के हो काल, दशानन के हमने देखें हैं हाल। लंका जलाकर खाक किए, विभीषण राज्य स्थापित किए। … Continue reading हे राम!