हे राम!
हे राम!

हे राम!

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कर जोड़ करूं तेरा वंदन,
हे रघुनंदन ! हे रघुनंदन।
दशरथ-कौशल्या के नंदन,
तीनों लोक करे तेरा वंदन;
महादेव इन्द्र ब्रह्मा भी करें पूजन।
अतातायियों के हो संहारक,
सतपथ के हो सृजन कारक।
दुष्ट पापियों के हो काल,
दशानन के हमने देखें हैं हाल।
लंका जलाकर खाक किए,
विभीषण राज्य स्थापित किए।
किसकिंधा नरेश बाली को मारा,
सुग्रीव को शासक बना वचन निभाया;
वचन, मित्रता की खातिर-
अपना सबकुछ दांव पर लगाया।
शासक होकर सेवक की भांति जीवन बिताया,
जनता की मांग पर देवी सीता को ठुकराया।
आदर्श राज्य किए स्थापित,
मर्यादा पुरुषोत्तम सुन होते हम आह्लादित।
पर तेरे नाम पर आज के शासक,
बन गये हैं शोषक।
करते हैं घृणित राजनीति,
जनता कर रही त्राहि-त्राहि;
सब हैं पीड़ित दुःखी और व्यथित ।
आज के नेताओं में-
स्वहित की लगी है होड़,
जनता की भलाई, सेवा दिए हैं छोड़।
इनपर भी आपकी कुदृष्टि होनी चाहिए,
रामराज्य की मर्यादा स्थापित होनी चाहिए।
इनका भी दमन कीजिए,
जनता की सेवा जो ना करे-
पदच्युत उन्हें कीजिए।
रावण और बाली की भांति-
अधर्मी से सत्ता लीजिए,
समुचित दण्ड भी दीजिए;
सचमुच का रामराज्य स्थापित कीजिए।

 

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नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

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