कहां ढूंढू | Kahan Dhundu

कहां ढूंढू ( Kahan dhundu )   गौतम, नानक-राम कहां ढूंढू मजहब के चार धाम कहां ढूंढू अमन के जैसे गुजरे है दिन वैसी सुबहो – शाम कहां ढूंढू मुंह में राम है बगल में खंजर ‘ सत्यवादी ‘ इक निज़ाम कहां ढूंढू मजहब-मजहब लड़ने वाले हैं सब ‘इंसानियत ‘ का पैगाम कहां ढूंढू झूठ-फरेब … Continue reading कहां ढूंढू | Kahan Dhundu