हाथों से छीनों न अमराइयाँ | Kavita Amraiyan

हाथों से छीनों न अमराइयाँ   सौदा परिंदों का हम न करेंगे, साँसों की रफ्तार घटने न देंगें। हाथों से छीनों न अमराइयों को, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? रोते हैं पेड़ देखो कुल्हाड़ियों से, हम सब बँधे उसकी साँसों की डोर से। हरियाली का प्याला कैसे पिएंगे, पर्यावरण बिनु कैसे जियेंगे? सौदा परिंदों का… बित्ताभर … Continue reading हाथों से छीनों न अमराइयाँ | Kavita Amraiyan