बोलती आंँखें | Kavita bolti aankhen

बोलती आंँखें ( Bolti Aankhen )   बोलती आंँखें सब बातें, मन के भावों को दर्शाती। हर्ष और आनंद मौज में, झूम झूमकर इठलाती।   आंँख दिखाते आज बेटे, बुड्ढे मांँ और बाप को। संस्कारों को भूलकर, वो बड़ा समझते आपको।   मांँ की आंखों में नेह की वर्षा, हो रही आज भी। उमड़ रहा … Continue reading बोलती आंँखें | Kavita bolti aankhen