पुरानी पेंशन बहाल करो | Kavita purani pension bahal karo

पुरानी पेंशन बहाल करो ( Purani pension bahal karo )   हर मुफलिस का देखो कलम सिपाही हूँ, मैं भी नंगी- पगडंडी का राही हूँ। जीवन जीने का मेरा अपना वसूल है, जो बातें सही नहीं लगती, फिजूल हैं। लोकतंत्र के पिलर तोड़े जाते हैं, औरों के सिर ठिकरे फोड़े जाते हैं। महज तालियों से … Continue reading पुरानी पेंशन बहाल करो | Kavita purani pension bahal karo