सोच की नग्नता | Soch ki Nagnata

सोच की नग्नता ( Soch ki Nagnata )   भरी गागर में और जल भरता नहीं बदल गई हो दिशा जिसकी वो तना सीधे खड़ा रहता नहीं लाख चाहकर भी आप सोच किसी की बदल सकते नहीं मिले हो जो संस्कार गर्भ से ही युवापन के बाद उसे सुधार सकते नहीं परिवार, पड़ोस ही देता … Continue reading सोच की नग्नता | Soch ki Nagnata