उजाला | Kavita Ujala

उजाला  ( Ujala )   रहती तो है कोशिश यही कि रहूँ मुकम्मल बात पर अपने कर देते हैं लोग हि मजबूर इतना कि फिर ख्याल बदल जाते हैं शिला पर भी यदि गिरती रहे धार तेज जल के प्रवाह की, तो निशान की पड़ हि जाती है छाप संगत बेअसर नही हो पाती होती … Continue reading उजाला | Kavita Ujala