व्यथा ( Vyatha ) बरसों के अथक परिश्रम का ऐसा हमें फलसफा मिला, न सम्मानित कोई पदवी मिली न ही कोई नफा मिला। दबाया कुचला हमें सबने जैसा जिसका मन किया, कभी अपमानित कभी प्रताड़ित जिसने जब चाहा किया। अब किससे हम विनय करें किसके जा चरण धरें, सारे निवेदन व्यर्थ हुए और अब … Continue reading व्यथा | Kavita Vyatha
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