Kavita Vyatha

व्यथा | Kavita Vyatha

व्यथा

( Vyatha )

 

बरसों के अथक परिश्रम का ऐसा हमें फलसफा मिला,
न सम्मानित कोई पदवी मिली न ही कोई नफा मिला।

दबाया कुचला हमें सबने जैसा जिसका मन किया,
कभी अपमानित कभी प्रताड़ित जिसने जब चाहा किया।

अब किससे हम विनय करें किसके जा चरण धरें,
सारे निवेदन व्यर्थ हुए और अब क्या हम करें।

ठोकरों की मार सह सहकर आंखें भी धूमिल हुई,
सांसें लगने लगी भारी जिंदगी भी बोझिल हुई।

सहन नहीं होती अब ये ज्यादतियां उम्मीदें अंतिम हुई,
न जाने ये कब रुकेगा आस में आधी जिंदगी खत्म हुई।।

रचनाकार –मुकेश कुमार सोनकर “सोनकर जी”
रायपुर, ( छत्तीसगढ़ )

यह भी पढ़ें :-

होली आई रे | Holi Aayi re

Similar Posts

  • मैं शून्य हूँ | Kavita Main Sunay Hoon

    मैं शून्य हूँ ( Main Sunay Hoon ) मैं शून्य हूँ जिसे शिखर का अभिमान है आवारगी है रगों में मेरी जिसका सहारा अम्बर है मैं अस्तित्व हूँ बूंद की जिसे साहिल का गुमान है मैं शब्द हूँ जिसका ये सारा जहां है मैं तुम में हूँ जो तुम्हारा निशां है तुम पिता हो मेरे…

  • आओ करें बागवानी | Kavita Aao Kare Bagwani

    आओ करें बागवानी ( Aao Kare Bagwani )   डाल-डाल चिड़िया चहके, ताल-तलइया पानी। कल-कल करके बहती नदिया, गाँव करे अगवानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी, जग की रीति पुरानी, अमिट हो अपनी निशानी। पेड़ न रोने पाएँ कहीं पे, इसपे नजर गड़ाना। छाँव न घटने पाए धरा पे, मिलकर इसे बचाना।…

  • सबके सहारे राम | Sabke Sahare Ram

    सबके सहारे राम ( Sabke Sahare Ram ) विधा कृपाण घनाक्षरी   राम राम भज मन, पुलकित तन मन। रघुवर राजाराम, लीला है अपरम्पार। राघव राम रट लो, जय श्रीराम भज लो। अवधपुरी पधारे, रघुपति करतार। जन जन प्यारे राम, सबके सहारे राम। मंझधार डूबी नैया, रामजी लगा दे पार। ऋषि मुनि ध्यानी योगी, माला…

  • ब्रह्मचारिणी | Brahmacharini Navratri Kavita

    ब्रह्मचारिणी ( Brahmacharini Navratri )   हे ब्रह्मचारिणी तपस्विनी सदाचरण की देवी करो कृपा हे जगदंबे मत करो अब देरी   आचरण को विमल कर दो निर्मल कर दो भाव शब्दों में तुम शक्ति भर दो मां दे दो चरणों की छांव   भरा रहे दरबार तुम्हारा सुख समृद्धि यश कीर्ति सृष्टि की करतार माता…

  • कागा की क़लम से | Kaga ki Kalam Se

    जाति धर्म जनता को नहीं बाटो जाति धर्म में ,मुफ़्त रेवड़ियां नहीं बांटो जाति धर्म में! चुनावों के चक्रव्यू में फंस धंस कर ,दलगत दलदल नहीं बाटो जाति धर्म में ! लोभ मोह माया छोड़ शिक्षा मुफ़्त करो ,अमीर ग़रीब नहीं बांटो जाति धर्म में! ऊंच नीच छूआ छूत भेद भव बेकार ,मानव को नहीं…

  • साधक शारदे का | Sadhak Sharde ka

    साधक शारदे का ( Sadhak sharde ka )   जो भी लिख लेता हूं आप छाप देते हो। शब्दों का गहरा जादू आप भांप लेते हो। मोती पिरोए माला में शब्द मधुर चुन के। कलम की रफ्तार को आप नाप लेते हो। गीतों के तरानों में रसधार बहा देते हो। मेरे अल्फाजों को तुम हार…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *