खोज

खोज सुख की खोज में आदमी देखो, कैसे दुख के पीछे दौड़ रहा है!घर है मगर वातानुकूलित नहीं है वह उसकी तृष्णा में चकरा रहाहै, मोटर है लेकिन सामान्य वह,‘लिमोजिन’ चढ़ने के लिए छटपटा रहा है सुख की खोज में लगने के बाद आदमी, आदमी कहाँ रह जाता है? देखते-देखते ही नदी की कलकल और, … Continue reading खोज