किधर जाता है

किधर जाता है राह-ए-उल्फ़त से परेशान, किधर जाता हैअपनी मंज़िल से भी अनजान किधर जाता है झूठ से हार के नादान किधर जाता हैमार के अपना तू ईमान किधर जाता है बिक रहा हूँ सरे बाज़ार तेरी शर्तो परदे के मुझको तू ये नुक़सान किधर जाता है तेरी यादों का उठा था जो मेरे सीने … Continue reading किधर जाता है