मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत

( बाल कहानी ) मुकुल भैया, आयुष से 6 वर्ष बड़े थे। आयुष दसवीं कक्षा में पढ़ता था और वे M. A. कर रहे थे। वे बहुत घमंडी थे। उनको अपनी पढ़ाई पर बहुत घमंड था। वह अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते थे। सभी को नीचा दिखाने की कोशिश करते थे। वह बच्चों … Continue reading मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत