मर्यादा पुरुषोत्तम: कथा से कर्म तक

(राम नवमी पर एक साहित्यिक आलेख) साहित्य, धर्म और संस्कृति जब एकत्र होकर किसी एक स्वरूप को आकार देते हैं, तो वह स्वरूप केवल वंदनीय नहीं, जीवंत होता है—वह प्रेरक होता है, वह पथप्रदर्शक होता है। श्रीराम ऐसा ही एक स्वरूप हैं—जो केवल देवता नहीं, एक जीवन-दर्शन हैं, एक मानवता का आदर्श हैं, और भारतीय … Continue reading मर्यादा पुरुषोत्तम: कथा से कर्म तक