मेरे हिस्से का प्रेम

मेरे हिस्से का प्रेम मैं तुम सेदूर हूँधूप और छाँव की तरहपुष्प और सुगंध की तरहधरा और नील गगन की तरहदिवस और निशा की तरहजनवरी और दिसम्बर की तरहसाथ-साथ होते हुए भीबहुत दूर- बहुत दूर परन्तुप्रति दिन मिलता हूँतुम सेतुम्हारी नयी कविता के रूप मेंनये शब्दों के रूप में जीवन मेंकभी कोई सुयोग बना..तोमैं तुम … Continue reading मेरे हिस्से का प्रेम