Mother Poem in Hindi | तभी तो मां कहलाती हैं

तभी तो मां कहलाती हैं ( Tabhi to maa kahlati hai ) खुद का निवाला छोड़, अपने बच्चे की थाली सजाती है। तभी तो मां कहलाती है देख मुस्कान औलाद के चेहरे पर, अपने सब गम भूल जाती है। तभी तो मां कहलाती है परवाह नहीं जमाने की, सिर्फ अपने बच्चों की खैरियत चाहती है। … Continue reading Mother Poem in Hindi | तभी तो मां कहलाती हैं