प्रकृति की सीख | Poem prakriti ki seekh
प्रकृति की सीख ( Prakriti ki seekh ) बदलना प्रकृति की फितरत फिर क्यों इंसान हिस्सेदार हैं। प्रकृति के बदलने में कहीं ना कहीं इंसान भी बराबर जिम्मेदार हैं। जैसे तप और छाया देना प्रकृति का काम हैं। वैसे ही कभी खुशी कभी गम, जिंदगी का नाम हैं। कभी कबार पूछता, आसमां … Continue reading प्रकृति की सीख | Poem prakriti ki seekh
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