Desbhakti Kavita -रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में

रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में ( Rahe Tan-Man Sada Apana Watan Ke Waste Jag Mein )   रहे  तन-मन  सदा अपनावतन के वास्ते जग में। बहारें  खुद  चली आती  चमन के वास्ते जग में।।   उसी  को थाम के  चलते वही रहता दिलों में है। तिरंगा पास में रखते कफ़न के … Continue reading Desbhakti Kavita -रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में