रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में

Desbhakti Kavita -रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में

रहे तन-मन सदा अपना वतन के वास्ते जग में

( Rahe Tan-Man Sada Apana Watan Ke Waste Jag Mein )

 

रहे  तन-मन  सदा अपनावतन के वास्ते जग में।
बहारें  खुद  चली आती  चमन के वास्ते जग में।।

 

उसी  को थाम के  चलते वही रहता दिलों में है।
तिरंगा पास में रखते कफ़न के वास्ते जग में।।

 

नहीं  हटते  कदम पीछे पड़े ग़र सामने दुश्मन।
डरे कब जंग लङने से अमन के वास्ते जग में।।

 

सुनाई  अब  नहीं  होती  मरे  जनता  भले बेशक।
तने फिरते हैं कुछ नेता दमन के वास्ते जग में।।

 

हुनर  सस्ता  नहीं  है  शायरी  का  इस ज़माने मे।
बहुत कुछ दाव पे लगता है फ़न के वास्ते जग में।।

 

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कवि व शायर: Ⓜ मुनीश कुमार “कुमार”
(हिंदी लैक्चरर )
GSS School ढाठरथ
जींद (हरियाणा)

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