रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी

रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। ख़्वाबे ग़फ़लत में खोए हुए थे।जागे-जागे से सोए हुए थे।आन में रूबरू आ के हाए।नींद उसने हमारी उड़ा दी।रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी।उसने बिजली सी दिल पर गिरा दी। मारे-मारे से फिरते थे … Continue reading रुख़ से चिलमन ज़रा क्या हटा दी