समानांतर रास्ते | Samanantar Raaste
समानांतर रास्ते ( Samanantar raaste ) एक झूठें विश्वासघाती और छद्मवेशी मनुष्यों के संसार में अकेली चल रही हैं आजकल मेरी रूह फँसी हाँड-माँस की इस देह में… दो अपनी भुमिका दृढ़ करने की कोशिश करती और एक अनोखी हसरत के संग जहाँ-तहाँ विचरण करती मेरी घुमंतू रूह को सिवाय उसके कोई बांध ना … Continue reading समानांतर रास्ते | Samanantar Raaste
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