Samanantar Raaste

समानांतर रास्ते | Samanantar Raaste

समानांतर रास्ते

( Samanantar raaste ) 

 

एक

झूठें
विश्वासघाती
और छद्मवेशी मनुष्यों के
संसार में
अकेली चल रही हैं आजकल
मेरी रूह फँसी
हाँड-माँस की इस देह में…

दो

अपनी भुमिका दृढ़ करने की
कोशिश करती
और एक अनोखी हसरत के संग
जहाँ-तहाँ विचरण करती
मेरी घुमंतू रूह को सिवाय उसके
कोई बांध ना सका था कभी
सांसारिक ताने बाने के बीच…

तीन

एक हसरत मासुम शिशु जैसी
जीती थी दिन-रात अन्तस में
सींचती थी अपने रक्त से
पालती थी पलकों पर
नाजुक ख्वाब की तरह
बस एक ही हसरत
सच्ची मोहब्बत पाने की…

चार

उसकी रूह के करीब आकर
ठहर गई थी मेरी रूह
उसकी रहस्यमयी मुस्कान पर
उन बोलती आँखों पर
और वो फड़कते होंठ
कहना गलत न होगा
रूक गया था वक्त वही मेरे लिए…

पाँच

साथ चले थे कुछ लम्हें हम
बिना कुछ चाहे अजीजों की तरह
फिर रास्ते अलग हो गए
अब रूह नही अटकेगी कभी
किसी और के चेहरे पर
किस्मत ने मिलाया था उससे
जीवनपथ के मोड़ पर…

छह

जहां से रास्ते समानांतर फूट गए
कभी फिर ना मिले शायद
खड़ा था उस मोड़ पर वो बेवफा
उसी शरारती मुस्कान के साथ
वही खनकती आवाज
किसी और राहगीर के साथ
जहां वादे निभाने के मुझसे किए थे…

सात

कुछ लम्हें संग बिताकर
चल दिया वो किसी और का हाथ थाम
मेरा परित्यक्त मन बहुत उद्गिन हैं
जीवन का ये लम्बा सफर
जहाँ हम अजनबी हो गए फिर
कभी ना मिलने वाले
रास्तों की तरह…

 

डाॅ. शालिनी यादव

( प्रोफेसर और द्विभाषी कवयित्री )

 

डाॅ. शालिनी यादव अंग्रेजी की प्रोफेसर और द्विभाषी कवयित्री है। उन्हें भारत, लीबिया और सऊदी अरब में विश्वविद्यालय स्तर पर सौलह साल का प्रगतिशील शिक्षण अनुभव प्राप्त है।अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संदर्भित पत्रिकाओं और संकलनों में समय समय पर डाॅ यादव के अंग्रेजी भाषा और साहित्य पर शोध लेख प्रकाशित होते रहते है। इसके अलावा अब तक वह शोध पत्रों के पांच संकलन Contemporary African Women Writers,

Reconnoitering Post colonial Literature (2022),

Emerging Psyche of Indian Woman: A Feminist Perspective (2022),

On the Wings of Life: Women Writing Womanhood (2021) संपादित कर चुकी हैं।

उनका अगला संकलन अफ्रीकन महिलाओं के संघर्षों पर लिखे शोधपत्र का है जो जल्द ही प्रकाशित होने वाला है। अंग्रेजी भाषा और साहित्य पर उनकी तीन पुस्तकें पहले भी प्रकाशित हो चुकी है।

विविध संकलनों और पत्रिकाओं में उनकी अंग्रेजी और हिन्दी मे लिखित कविताएँ और लघु कथाएं प्रकाशित होती रहती है।

हाल में उन्होनें सताइस देशों के 41 बेहतरीन कवियों की अंग्रेजी कविताओं का संकलन Across the Seas (2022) सम्पादित किया है।

इसके अलावा अंग्रेजी कविताओं के तीन संग्रह ‘Till the End of Her Subsistence’ (2013), ‘Kinship With You’ (2014) और ‘Floating Haiku’ (2015) और हिन्दी साहित्य में ‘क्षितिज के उस पार’ (2016) काव्य-संग्रह प्रकाशित हो चुके है।

सम्पादन कार्य मे विशेष अभिरुचि के तहत डाॅ यादव कई देशों की अन्तर्राष्ट्रीय ई-पत्रिकाओं के सम्पादकीय दल की सदस्य भी है।

वह विभिन्न अंग्रेजी साहित्य और काव्य से सम्बंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुहों और संगठनों से भी जुड़ी हुई है। समय समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले काव्य पाठन महोत्सवों में भी अपनी कविताओं का पठन करती रहती है।

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/anindh-sundari/

Similar Posts

  • कृष्ण जन्माष्टमी | Krishna Janmashtami

    कृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami )    काली घटा रात में छाई यमुना जब अपने तट आई उफन उफन वो पैर पड़त है देखो जन्मे कृष्ण कन्हाई ।। वासुदेव के आठवें पुत्र रूप में कृष्ण अष्टमी को प्रगट हुए मात पिता के संकट मिटाने श्री नारायण धरती पर जन्मे।। जन्म लिया पर देखो कैसी ,लीला…

  • सोच रही शकुंतला | Soch Rahi Shakuntala

    सोच रही शकुंतला ( Soch rahi shakuntala )   जल में रख कर पाव सोच रही शकुंतला ले गए ओढ़नी मेरी दे गए गहरी पीर मोहे कब आओगे प्रियवर तकत राह ये नैन हूं अधीर बेचैन जल लेने को आई थी जल नैनों से छलके रे विरहन इस अगन को जल से ही शीतल करे….

  • एक शादी ऐसा भी | Ek Shadi Aisa Bhi

    एक शादी ऐसा भी ( Ek Shadi Aisa Bhi ) अनंत-राधिका की शाही शादी को देखा, करोड़ों की कुबेर में लिपटते हुए देखा , हालीवुड,वालीवुड को थिरकते हुए देखा, राजनयिकों,राजाओं की अगुवाई को देखा, योग के शलाकपुरूष का योगाभ्यास को देखा, काशी विश्वनाथ के मठाधीशों को देखा, गरीब-गुरबे ,भूखों की आहट को न सुना ।…

  • Kavita | दुनिया

    दुनिया ( Duniya )   रात  मे  चाँद को , जिसने  चमकना  सिखाया । सूरज की किरणों को ,आलोक फैलाना बताया ।। ग्रीष्म ,वर्षा ,शीत ,बसंत ,होती अजीब घटनाएं है । वंदन  है  प्रभु ! उन्हें , जिसने  ये दुनिया बनाया ।। उफनती  नदियों  को , जिसने  बहना  सिखाया । गहरी  काली  झीलो  को ,…

  • न्याय की पुकार

    न्याय की पुकार उपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला,अपेक्षित को आज तक न्याय नहीं मिला। सालों से होते ज़ुल्मो सितम ग़रीबों से,ग़रीब को आज तक न्याय नहीं मिला। सुनते नहीं पुकार कानों में ठोंसा कपास,शोषित को आज तक न्याय नहीं मिला। बहिन बेटियों से होते बलात्कार सरे आम,अछूत को आज तक न्याय नहीं मिला।…

  • लेखक | Lekhak

    लेखक ( Lekhak )    सत्य का समर्थन और गलत का विरोध ही साहित्य का मूल उद्देश्य है कहीं यह पुष्प सा कोमल कहीं पाषाण से भी सख्त है कहीं नमन है वंदन है कहीं दग्ध लहू तो कहीं चंदन है मन के हर भावों का स्वरूप है साहित्य हर परिस्थितियों के अनुरूप है साहित्य…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *