Tag: अन्नदाता

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    अन्नदाता   क्यूँ ! तुम जान लेने पर आमादा हो इन बेकसूर और भोले भाले किसानों की ये अन्नदाता ही नहीं है, देश की रीढ़ भी है ये ही नहीं रहेंगे तो देश कैसे उन्नति करेगा……!   ये तो यूँ भी मर रहे हैं कर्ज़ तले दब कर कभी फाँसी, कभी ज़हर, कभी ऋण कभी…

  • अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए | Annadata par kavita

    अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए | Annadata par kavita

    अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए ( Annadata ka dhara par maan hona chahiye ) ******** अन्नदाता का धरा पर मान होना चाहिए, उनके हित में भी कभी कुछ काम होना चाहिए। विषम परिस्थितियों में कठिन श्रम कर अन्न उगाते हैं, स्वयं भूखे रहकर भी देश को खिलाते हैं। खाद पानी बीज के लिए…