Tag: Ek ghazal
जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है | Ek ghazal
जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है ( Jidhar dekho lahoo bikhra hua hai ) जिधर देखो लहूँ बिखरा हुआ है नगर में आज फ़िर दंगा हुआ है लगी है आग नफ़रत की दिलों में यहाँ हर आशियाँ उजड़ा हुआ है बहुत नजदीक था मेरे कभी जो उसी से ख़त्म हर रिश्ता हुआ…
मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें | Ghazal
मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें ( Muhabbat ka dilon mein gul khila de ) मुहब्बत का दिलों में गुल खिला दें हवा ऐसी यहां सबको ख़ुदा दें गरीबों पे सितम हो जो रहा है ख़ुदा उन दुश्मनों का सर झुका दें उतरे तन से नफ़रत की धूल सबके उल्फ़त…