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  • लम्हा लम्हा बिखरता सा मैं | Lamha shayari

    लम्हा लम्हा बिखरता सा मैं ( Lamha lamha bikharta sa main )     दिन के उजालों में हर सवाल पर लम्हा लम्हा बिखरता सा मैं   रात तेरी आगोश में सिमट कर पुर्जा पुर्जा समेटता सा मैं   महबूब सी लगे है , ए रात ,कभी तू मुझे  पहलू में सर रख  तेरे ,पुरसुकून…