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इश्क़ ए जुनूँ. | Ghazal Ishq – e – Junoon
इश्क़ ए जुनूँ. ( Ishq – e – Junoon ) दिले कैफियत में तुम्हारी खैरियत मिलाए बैठे हैं अपने अर्श में तुम्हारा अक्स मिलाए बैठे हैं क्या हुआ जो आसमाँ का चाँद हो तुम साहब फिर भी शिद्दत से तुम्ही पर नज़रें गड़ाए बैठे है। इश्क़ जुनून बना है जाने क्या असर ये…