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मुहब्बत के जब से ही वो गुलाब टूटे है | Muhabbat shayari
मुहब्बत के जब से ही वो गुलाब टूटे है ( Muhabbat ke jab se hi wo gulab tute hai ) मुहब्बत के जब से ही वो गुलाब टूटे है अंदर से ही खूब हम भी ज़नाब टूटे है ज़वाब देता नहीं था मुहब्बत का मेरी लबों पे ही आज उसके ज़वाब टूटे…