Tag: Poem on ghar ka batwara

  • घर का बटवारा | Kavita ghar ka batwara

    घर का बटवारा ( Ghar ka batwara )   घर की चौखट दीवारें भी कांप उठी थी आज जाने किसकी नजर लगी बरस पड़ी थी गाज   घर के बंटवारे को लेकर अब बैठ गए सब भाई बाबूजी की पेंशन पर भी हिसाब जोडै पाई पाई   सारा आंगन थर्राया बहना का भी दिल भर…