Tag: Poem Wo Ghamon Mein bhi Muskurati hai

  • वह गमों में भी मुस्कुराती है | Poem Wo Ghamon Mein bhi Muskurati hai

    वह गमों में भी मुस्कुराती है ( Wo ghamon mein bhi muskurati hai )   हंसकर कहकहा लगाती है गम अमृत समझ पी जाती है बहते नीरो को छिपा जाती है सुनकर भी सब दबा जाती है निष्ठा से फिर खड़ी हो जाती क्योंकि वह सब भाप जाती है शांति के लिए सह जाती है…