Ghazl | तुम्हारे बिन जहां किस काम का है

तुम्हारे बिन जहां किस काम का है ( Tumhare Bin Jahan Kis Kam Ka Hai )   लोग  कहते  हैं  कि  आराम  का है। तुम्हारे बिन जहां किस काम का है।।   हथेली पर रोज लिखना मिटाना भी, बस  यही काम सुबहो शाम का है।।   फूल  तो  ले  गये  ले जाने वाले, सिर्फ  कांटा  … Continue reading Ghazl | तुम्हारे बिन जहां किस काम का है