वो घूंघट पट खोल रहा है

वो घूंघट पट खोल रहा है वो घूंघट पट खोल रहा हैतन-मन मेरा डोल रहा है आजा,आजा,आजा,आजामन का पंछी बोल रहा है अपने नग़मों से वो मेरेकानों में रस घोल रहा है पाप समझता था जो इसकोवो भी अब कम तोल रहा है मेरे घर की बर्बादी मेंअपनों का भी रोल रहा है लगते हैं … Continue reading वो घूंघट पट खोल रहा है