“जैदि” की ग़ज़ले | Zaidi ki Ghazlein
अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में प्यासी जमीं को, जीवन मिल गया, बूंद गिरी पानी की बदन खिल गया। ==================== अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में, चंद मुलाकात में कोई ले दिल गया। ==================== मुझको हाल ए दिल की ख़बर न थी, न जाने कैसे पैदा कर मुश्किल गया। ===================== सब कुछ लुटा देख मैं … Continue reading “जैदि” की ग़ज़ले | Zaidi ki Ghazlein
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