अखियां लड़ गई | Geet akhiyan lad gayi

अखियां लड़ गई

( Akhiyan lad gayi )

 

अखियां लड़ गई भरे बजार दिल को करार आया।
उनको देखा पहली बार दिल को मेरे प्यार आया।
अखियां लड़ गई भरे बजार…

 

मस्तानी चाल दीवानी मिल गई सपनों की रानी।
महकी जीवन की बगिया प्यार की नई कहानी।

मनमौजी मन ले हिलोरे नए तराने उमड़ रहे।
बरस रही प्रेम की धारा मेघ सुहाने घूमड रहे।

आ गए वो जिंदगी में चाहतों का गुब्बारा आया।
मनमयूरा झूम के नाचे प्यार आया प्यार आया।
अखियां लड़ गई भरे बजार…

 

दिल हो गया दीवाना मेरा आंखें झील सी लहराई।
धड़का दिल यह बार-बार उनकी देख अंगड़ाई।

उनकी अदा लुभाती दिल में प्रेम ज्योत जगाती।
जले ज्यों दीया और बाती गीत सदा प्रेम के गाती।

लगे धुन प्यारी मुरली तान मौसम मदमस्त छाया।
दिल की धड़कनों में प्यार भरा खुमार आया।
अखियां लड़ गई भरे बजार…

 

महफ़िल महक जाए दिलदार हो उनका दीदार।
दिलों में बसे प्रेम अपार कुदरत भी करती श्रंगार।

साज थिरक गए सारे संगीत फूट पड़ा दिल से।
लबों ने गीत जो गाए लगा सदियों से हम मिलते।

आज उनकी आहट से मन को चैन बहुत आया।
उनको देखा बार-बार फिर भी दिल ना भर पाया।
अखियां लड़ गई भरे बजार…

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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