मेरा वतन है जग से न्यारा

मेरा वतन है जग से न्यारा

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

गंगा, पर्वत झरने, उपवन,
हर लेते ये बरबस ही मन,
राजा हो या फिर वनवासी,
अलग अलग है भाषा भाषी,
सूरज चाँद सितारे मिलकर,
होने देते कभी भी तम नहीं।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

शान न कम कभी होने पाए
आन पर इसकी वारी जाए,
दुश्मन गर जो आँख दिखाये,
खैर न उसकी फिर होने पाये,
मिट जाए ये जिस्म औ जान ,
पर ज़रा भी हमको गम नही ।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

इस माटी पर जन्म लिया,
इसकी ख़ातिर मिट जायेंगे,
देकर प्राणों की आहुति हम,
तेरा नाम अमर कर जायेंगे,
तुम से बढ़कर तुम से प्यारा,
अपना दिलबर सनम नहीं ।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

भारत तेरी रक्षा की खातिर
जिन वीरो ने जान जान गंवाई,
लहू बहाकर अपना तुम पर,
अपने वतन की लाज बचाई,
गर्व है हमको उन वीरो पर,
उन सा किसी में है दम नही।।

मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।।

डी के निवातिया

डी के निवातिया

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