छोड़ दे ऐब को

छोड़ दे ऐब को

छोड़ दे ऐब को, तख़सीस ,दुआ तू रख ले
अपने असलाफ़ के अख़लाक़ की तू बू रख ले

तू सलीके से पहुँच जाए बुलंदी पे भी
ख़ार दे गुल के मुझे और तू ख़ुशबू रख ले

है फ़रेबी ये जहाँ लोग तमाशाई भी
मत बिफर नादां तू गुस्से पे भी काबू रख ले

मिल ही जायेगी किसी रोज़ रहे मंज़िल भी
गर न हासिल हो मेरी आँखों के आँसू रख ले

रोशनी देंगें तुझे तीरगी के आलम में
साथ अपने तू मेरी याद के जुगनू रख ले

धोखा देते हैं यहाँ लोग तो मासूमों को
तौलना है तुझे ईमां तो तराज़ू रख ले

जुस्तजू है ये मेरी और है ख़्वाहिश मीना
तू न कमज़ोर कभी हो मेरे बाज़ू रख ले

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

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