Category: ग़ज़ल
श्वान-व्यथा (दर्द-ए-कुत्ता)
श्वान-व्यथा (दर्द-ए-कुत्ता) हम इंद्रप्रस्थ के रखवाले,यह धरा हमारे पुरखों की ।हमने देखे हैं कई बार,शासन-सत्ता सुर-असुरों की ।। हमने खिलजी को देखा है,देखा है बिन तुगलक़ को भी ।देखा है औरंगज़ेब औरगज़नी, ग़ोरी, ऐबक को भी ।। तैमूर लंग जैसा घातक,नादिर शाह भी देखे हैं ।अब्दाली से अंग्रेजों तक,की सत्ता नयन निरेखे हैं ।। अब…
जाने क्यों इतराते हैं लोग…?
जाने क्यों इतराते हैं लोग…? खुद को समझदार समझकर जाने क्यों इतराते हैं लोग,प्रश्नों के जाल में आकर खुद ब खुद फँस जाते हैं लोग। सच की परछाई से डरकर नज़रें क्यों चुराते हैं लोग,झूठ के सहारे दुनिया में मेले क्यों सजाते हैं लोग। रिश्तों की सौदागरी में दिल का वज़न भुला बैठे,फ़ायदे की ख़ातिर…
सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें -2 | Poetry of Sarfraz Husain Faraz
तमाशा यह भी जहां को दिखा दिया मैंने तमाशा यह भी जहां को दिखा दिया मैंने।ख़िज़ां को फ़स्ले-बहारां बना दिया मैंने। किताबे-दिल से भी उसको हटा दिया मैंने।के जिसको अपनी नज़र से गिरा दिया मैंने। कहा था जो भी वो कर के दिखा दिया मैंने।वफ़ा से तेरी जफ़ा को हरा दिया मैंने। परिन्दा प्यार का…
विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2
मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…
ख़बर रखता है
ख़बर रखता है ज़ख़्म देकर भी वो पल-पल की ख़बर रखता हैनब्ज़ कब बन्द हो इस पर भी नज़र रखता है उसकी उल्फ़त पे यक़ीं कैसे भला मैं कर लूँहैसियत पर जो मेरी आँख ज़बर रखता है जाने कितने ही किराये के मकानों में रहेअपना घर ही मेरा ख़ुश जान जिगर रखता है जब अचानक…
ग़ज़ल सम्राट विनय साग़र जी
विनय साग़र जी वही उस्ताद हैं मेरे ग़ज़ल लेखक विनय साग़रजिन्हें है जानती दुनिया ग़ज़ल सम्राट साग़र जी हमारी भी ग़ज़ल की तो करें इस्लाह साग़र जीउसी पथ पर सदा चलता करें जो चाह साग़र जी बड़ा अनभिज्ञ हूँ मैं है नहीं कुछ ज्ञान भी मुझकोमगर हर पथ की बतलाते मुझे हैं थाह साग़र जी…
डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry
छंद-मनहरण घनाक्षरी कण्ठ शोभे सर्प माला ,शिव पिये विष प्यालाबेल पत्र अति प्रियत्रिशूल वो धारी है । सोम शिव सिर सोहे, संग गंगा मन मोहेडमरू लिए हाथ मेंनंदी की सवारी है। शिव पूजे वर मिले , शिव कृपा सृष्टि चले धन धान भर देतेभोला वो भंडारी है । हर पीड़ा हर हरे , हर काम हर…
सुमन सिंह याशी की ग़ज़लें | Suman Singh Yashi Poetry
ठोकर लाखों खाई होगी ठोकर लाखों खाई होगी । तब आख़िर टकराई होगी। ऐब गिनाने से पहले तुम ढूंढों, कुछ अच्छाई होगी II कितनी उम्मीदें आँखों में I पलती ले अंगड़ाई होगी II जब आँखें ही मोल न समझे I तब आवाज उठाई होगी II यार खिलौना दिल मत समझो। एक दिन सब भरपाई होगी।।…
सीमा पाण्डेय ‘नयन’ की ग़ज़लें | Seema Pandey Nayan Poetry
दिल क़रार आए तो खिलेंगे गुल भी मगर ये बहार आए तो,है बेक़रार बहुत दिल क़रार आए तो। तमाम किस्से हैं बातें तमाम करनी हैंवो मेरा हम नवाज़ ग़म गुसार आए तो। यकीं है पास मेरे लौट के वो आएगा,है बदगुमान अभी ऐतिबार आए तो। असीर उसको बना लूंगी फिर मैं जुल्फों का,कभी जो हाथ…
वैभव असद अकबराबादी की ग़ज़लें | Vaibhav Asad Poetry
फ़िर वही सब किया तो सुन बैठे फ़िर वही सब किया तो सुन बैठेइक परी-रू के ख़्वाब बुन बैठे उसकी पायल की छनछनाहट यारसाज़ पर किस तरह ये धुन बैठे साफ़ सुधरी सी ज़िंदगी जीनाबड़ी कमबख़्त राह चुन बैठे इश्क़ वालों को इश्क़ से मतलबउनको क्या करना कितने गुन बैठे मुस्कुराए तो खिल उठे क़िस्मतरूठ…