नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो

नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो

नाम लेकर मुझे तुम बुलाया करो
जब भी जी चाहे तुम आज़माया करो

बेगुनाहों की फ़रियाद सुनता है रब
झूठी तुहमत न ऐसे लगाया करो

इश्क़ का तुहफा भी नज़्र करती तुम्हें
मेरी ग़ज़लों में आकर समाया करो

बात माना करो दूसरों की भी तुम
हर समय अपनी ही मत चलाया करो

ये झिझक कैसी जब इश्क़ तुमको हुआ
बेधड़क मुझसे मिलने तुम आया करो

दर्दे-दिल की दवा है मेरे पास भी
हाले-दिल तुम न मुझसे छुपाया करो

जीस्त मीना ख़ुदा की अमानत है ये
मुफ़्त में इसको तुम मत लुटाया करो

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • खामोशी | Khamoshi Shayari

    खामोशी ( Khamoshi )    नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…

  • प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता

    प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता प्रेम कभी झूठ नहीं बोलताना ही किसी का वो बुरा सोचता शांत कुशल सौम्य एवं संयमीशब्द बिना मौन से है बोलता साथ की आदत है एसी पड़ गयीपल भी अकेला वो नहीं छोड़ता दूर ही रहता है विवादों से वोफूट चुकी मटकी नहीं फोड़ता यार सृजनशील है सपने में भीखंडहरो…

  • निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

    निगाहें मिलाकर ( Nigahen Mila Kar )   देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर ! करोगी कत्ल तुम कई आशिको का, ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर ! घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी, करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर ! ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श…

  • महेन्द्र सिंह प्रखर की ग़ज़लें | Ghazals of Mahendra Singh Prakhar

    क्या-क्या सोचा था वो और क्या हो गये क्या-क्या सोचा था वो और क्या हो गयेआज अपने ही मुझसे खफ़ा हो गये प्राण तन से हमारे जुदा हो गयेडॉक्टर जी जहाँ के खुदा हो गये देखकर रंग जिनका फिदा हम हुएयार वो हमसे क्यों बेवफ़ा हो गये आज पढ़कर ग़ज़ल हम भी गुरुदेव कीशेर दर…

  • मुसाफ़िराना है | Ghazal Musafirana Hai

    मुसाफ़िराना है ( Musafirana Hai ) हम ग़रीबों का यह फ़साना है हर क़दम ही मुसाफ़िराना है यह जो अपना ग़रीबख़ाना है हमको मिलकर इसे सजाना है कितना पुरकैफ़ यह ज़माना है रूठना और फिर मनाना है बीबी बच्चों की परवरिश के लिए जाके परदेश भी कमाना है सारे घर के ही ख़्वाब हैं इसमें…

  • बारिश | Baarish Poem

    बारिश ( Baarish )    आई है सौ रंग सजाती और मचलती ये बारिश रिमझिम रिमझिम बूंदों से सांसों में ढलती ये बारिश। दर्द हमेशा सहकर दिल पत्थर के जैसे सख़्त हुआ सुन कर दर्द हमारा लगता आज पिघलती ये बारिश। याद हमें जब आते हैं वो उस दिन ऐसा होता है पांव दबाकर नैनो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *